छत्तीसगढ़

मल्चिंग सीट एवं ड्रीप सिंचाई से जुड़कर किसान बाड़ी विकास योजना का ले रहे लाभ

किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे निःशुल्क बीज एवं फलदार पौधे

रायगढ़ : छत्तीसगढ़ शासन की नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजना किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान कर रही है। ग्रामवासियों के परम्परागत बाडिय़ों को साग-सब्जियों के लिए उन्नत बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा है कि ग्रामवासियों को अपने गांव में एक ही जगह पर बाड़ी के लिए नाला, गाय रखने के लिए गौठान, खाद के लिए घुरवा की सुविधा मिल सके, ताकि किसान भाई-बंधुु इसका लाभ उठा सके।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन संजय त्रिपाठी ने बताया कि नरवा, गरूवा, घुरवा एवं बाड़ी योजनान्तर्गत अंतर्गत किसानों को बाड़ी के लिए अनुदान पर मलचिंग सीट की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। साथ ही निःशुल्क मिर्च, भिन्डी, बरबटी,

करेला का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। ड्रीप सिंचाई योजना के तहत किसानों को सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जा रहे है। जिले में 114 ग्राम पंचायत में 11400 किसानों को बाड़ी विकास से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

जिसमें किसानों को फलदार वृक्ष भी दिया जा रहा है, ताकि वे अपने बाड़ी के मेड़ो में लगाकर हरा-भरा कर सके। खेत में मेड़ बनाने का कार्य प्लास्टिक मल्चिंग सीट का उपयोग बाड़ी में कैसे बिछाया जाता है। इसके बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि किसानों को बाड़ी विकास के साथ जोड़कर खेती-बाड़ी को संरक्षित करने के लिए नमी को कैसे सोखा जाता है। खरपतवार को दूर करना साथ ही तेज धूप से जमीन को सुरक्षित रखने और ड्रीप सिंचाई से पानी के उपयोग के बारे में बताया जा रहा है।

उद्यान अधिकारी एस.एन.कुशवाहा ने बताया कि घरघोड़ा विकासखण्ड के ग्राम बैहामुड़ा के किसान सुरेश पटेल को मनरेगा से स्वीकृत परम्परागत कच्चा वर्मी टांका की सुविधा दी गई है। साथ ही उनको मलचिंग सीट भी दिया गया है। किसान भाई-बंधु प्रोत्साहित होकर अपनी बाड़ी में लकड़ी और बास-बल्ली की व्यवस्था करके बाड़ी को सुरक्षित रख रहे है।

इसी प्रकार खरसिया विकासखण्ड के कृषक मुरलीधर साहू भी अपने बाड़ी योजना का लाभ लेकर अपने खेतों में बैगन, पत्तागोभी, मिर्च, टमाटर, धनिया, बरबटी, परवल की खेती कर रहे है। किसानों को उन्नत तकनीकी से खेती करके कम लागत से अधिक लाभ के बारे में भी बताया जा रहा है, ताकि किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके।

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